गडकरी बोले: इंफ्रास्ट्रक्चर में नवाचार और ग्रीन टेक्नोलॉजी जरूरी

Fri 10-Apr-2026,04:53 PM IST +05:30

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गडकरी बोले: इंफ्रास्ट्रक्चर में नवाचार और ग्रीन टेक्नोलॉजी जरूरी Nitin-Gadkari-Infrastructure-Innovation-Green-Tech-India
  • नितिन गडकरी ने निर्माण क्षेत्र में नवाचार, तकनीक और सतत विकास को विकसित भारत 2047 के लिए जरूरी बताया।

  • जैव ईंधन, प्लास्टिक कचरे और वेस्ट-टू-वेल्थ तकनीक अपनाने से पर्यावरण संरक्षण और लागत में कमी की बात कही।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने निर्माण और अवसंरचना क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक प्रौद्योगिकी और सतत पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नए समाधान अपनाने होंगे।

नई दिल्ली में आयोजित 17वें सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार एवं प्रदर्शनी ‘विकसित भारत 2047’ को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि ज्ञान को धन में बदलने के लिए नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान और अनुसंधान का समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि निर्माण क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और इसमें नई तकनीकों के प्रयोग से दक्षता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सकता है।

गडकरी ने निर्माण लागत को कम करने के लिए आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन प्रणाली अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के समय पर पूरा होने के लिए त्वरित निर्णय, सटीक योजना और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि भूमि अधिग्रहण और वैधानिक स्वीकृतियों में देरी परियोजनाओं को प्रभावित करती है, इसलिए इन प्रक्रियाओं को पहले ही पूरा करना आवश्यक है।

उन्होंने गुणवत्ता आधारित मूल्यांकन प्रणाली की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि केवल लागत पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्ता और दीर्घकालिक प्रदर्शन को प्राथमिकता देनी चाहिए।

सतत विकास की दिशा में गडकरी ने जैव ईंधन, बायोमास आधारित ईंधन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और लागत में कमी भी आएगी।

गडकरी ने सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे और पुराने टायरों के उपयोग जैसे ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल को अपनाने का भी सुझाव दिया। उन्होंने नागपुर में किए गए ऐसे प्रयोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि इनसे सकारात्मक परिणाम मिले हैं और यह मॉडल देशभर में लागू किया जा सकता है।

उन्होंने उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि नई तकनीकों का विकास और उनका प्रभावी उपयोग किया जा सके।

गडकरी ने यह भी कहा कि भारतीय अवसंरचना कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता साबित की है और दुबई, कतर तथा अफ्रीकी देशों में सफल परियोजनाओं के जरिए अपनी पहचान बनाई है।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने विजेताओं को सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार प्रदान किए और उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि यह क्षेत्र भारत के विकास में अहम भूमिका निभाएगा।